कोटा में फँसे बिहार के छात्र, बच्चों जैसे बहाने बनाती बिहार सरकार

असम सरकार ने डबल इंजन चार्टड विमान से अधिकारियों का दल जयपुर भेजा है। ताकि असम से जयपुर की यात्रा का समय बचें और वे कोटा जाकर अपने छात्रों को ले आएँ। इन छात्रों को विमान से नहीं ले जाया जाएगा। 
उधर बिहार सरकार ज़िद पर अड़ी है। पटना हाईकोर्ट में कहा है कि वह तालाबंदी के नियमों का पालन सख़्ती से कर रही है। 
हंसी आती है।

क्या बिहार सरकार यह कह रही है कि बाक़ी राज्य तालाबंदी के नियमों को तोड़ कर अपने छात्रों को ला रहे हैं? 
तालाबंदी के नियम कोई अंतिम बार के लिए नहीं बने हैं। रोज़ इनमें ढील दी जा रही है। बदलाव हो रहे हैं। 
अगर इतने सारे राज्यों ने नियमों को तोड़ कर अपने छात्रों को वापस बुला लिए हैं तो क्या उन्हें इस अपराध के लिए सज़ा भी मिलेगी ?  हाई कोर्ट ही बता दें या नीतीश कुमार वो किताब दिखा दें जहां लिखा है कि बाक़ी राज्यों ने नियम तोड़े हैं? 
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बता सकते हैं कि उनकी नाक के नीचे असम चार्जर्ड प्लेन भेज रहा है अपने छात्रों को कोटा से लौटाने के लिए। इस ग़ैर क़ानूनी काम के लिए इजाज़त क्यों दी गई? किसने दी ? 
जब राजनीति में जनता का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और वह धर्म को राजनीति समझने लगती है तो राजनीतिक दल उसे अपना गुलाम समझने लगते हैं। 
मैंने पहले भी कहा है। नीतीश कुमार जनमत के नुक़सान की कोई चिन्ता न करें।कोविड-19 के समय धर्म के नाम पर जो ज़हर बोया गया है वो राजनीतिक फल देगा। बिहार की बर्बाद शि़क्षा व्यवस्था को अनदेखा करते इन्हीं बच्चों के माँ बाप हर दम पर सांप्रदायिकता के प्रति अपनी वफ़ादारी निभाएँगे। उनके व्हाट्स एप में बस थूकने को लेकर मीम की सप्लाई होती रहें ताकि वे ग़रीब सब्ज़ी वाले से नाम पूछते रहें।

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